बीजिंग, संयुक्त राष्ट्र। एक ओर जहां भारत में पहले ही मंदी, महंगाई, बेरोजगारी और कंगाली जबरदस्त थी, पश्चिम ऐशिया संकट के बाद यह और भयावह हो गई। 28 फरवरी को इस्राइल और अमेरिका ने ईरान पर गैर कानूनी, गैरजरूरी हमला कर दुनिया को संकट में डाल दिया। जवाब में ईरान ने इस्राइल, अमेरिका और खाड़ी देशों को जबरदस्त हमलों से भारी नुक्सान पहुंचाया। उसने सर्वाधिक व्यस्त होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया जिससे वैश्विक तेल, गैस, खाद, कैमिकल इत्यादि चीजों का आयात निर्यात ठप्प हो गया। भारत, एशिया और दुनिया भर में इससे भारी आर्थिक संकट पैदा हो गया। लेकिन इस बीच चीन ने तेज आर्थिक तरक्की की है। असल में उसने डेढ़ साल पहले ही इस पर का शुरु कर दिया था। होर्मुज बाधित होने से जब अमेरिका सहित पूरी दुनिया आर्थिक रूप से डावांडोल हो गई तो चीन को कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा, उसने पहले ही पर्याप्त इंतजाम कर लिए थे। ईरान से सहयोग के कारण उसके तेल टैंकर भी गुजरते रहे। चीनी राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अप्रैल तक देश भर में प्रमुख औद्योगिक उद्यमों का कुल लाभ 24 खरब 35 अरब 84 हजार युआन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 18.2 प्रतिशत की वृद्धि है। तीन प्रमुख क्षेत्रों खनन और विनिर्माण में क्रमशः 26.0 प्रतिशत और 20.4 प्रतिश की वृद्धि दर्ज की गई, जो पहली तिमाही से क्रमशः 9.8 और 1.3 प्रतिशत अंक अधिक है, बिजली, ताप, गैस और जल के उत्पादन और आपूर्ति में 1.9 प्रतिशत की गिरावट आई, जो पहली तिमाही से 1.3 प्रतिशत अंक कम है। अप्रैल में, देश भर में प्रमुख औद्योगिक उद्यमों के मुनाफे में 24.7 प्रतिश की वृद्धि हुई। चीन ने घरेलू खपत काफी बढ़ाई है। शहरों से लेकर गांवों तक रोजगार, कारोबार और मांग को बढ़ाया है जिससे चीन तेज आर्थिक तरक्की दिख रही है।
आंकड़ों के अनुसार औद्योगिक उत्पादन में तीव्र वृद्धि जारी रही और औद्योगिक उत्पादों के उत्पादक मूल्य सूचकांक में उछाल आया, जिससे औद्योगिक उद्यमों की परिचालन आय में स्थिर वृद्धि को बल मिला। जनवरी से अप्रैल तक, देश भर में प्रमुख औद्योगिक उद्यमों के परिचालन राजस्व में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो जनवरी से मार्च से 0.2 प्रतिशत अंक अधिक है। उपकरण निर्माण और उच्च-तकनीकी विनिर्माण जैसे उभरते उद्योग महत्वपूर्ण अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। कच्चे माल विनिर्माण क्षेत्र में लाभ वृद्धि की गति लगातार तेज हो रही है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि औद्योगिक उद्यमों की संचयी इकाई लागत में इस वर्ष लगातार चार महीनों से गिरावट आई है। असल में चीन ने नागरिकों को खर्च करने के लिए नकद धनराशि और तमाम तरह की छूटें और अन्य प्रोत्साहन दिए जिससे नागरिक बाजार में खर्च कर सकें। इससे वस्तुओं और सेवाओं, पर्यटन, मनोरंजन इत्यादि विविध क्षेत्रों में गतिविधियां तेज रहीं। नतीजा चीन में आर्थिक विकास की गति बढ़ गई। जबकि भारत सहित अनेक देशों ने नागरिकों की दिक्कतों को नजरअंदाज कर उन पर तरह - तरह के प्रतिबंध लाद दिए जिससे कारोबार और रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ा। तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था का दावा करने वाले भारत के नीति-निर्धारकों ने अर्थव्यवस्था विरोधी कार्रवाइयों से भारत को छठी अर्थव्यवस्था की स्थिति में पहुंचा दिया। आज भारत में जनता तमाम तरह से बेहद परेशान है लेकिन सत्तारूढ़ नेता, नौकरशाह और सरकार के करीबी पूंजीपति खूब मालामाल हो रहे हैं।
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