उत्तराखंड सरकार राहुल गांधी के कार्यक्रम को विफल करने में पूरी तरह विफल रही
देहरादून, 17 जुलाई, 2026। उत्तराखंड भाजपा सरकार द्वारा देहरादून में राहुल गांधी के कार्यक्रम को विफल करने की तमाम कोशिशों के बावजूद छात्र, युवा और सभी आयु के उम्र के लोग भारी संख्या में शामिल हुए। लोग इस कार्यक्रम में कम जाएं इसके लिए सरकार ने परेड ग्राउंड में एक नाच-गाने, मनोरंजन का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया था जिसे अधिक लोगों ने तवज्जो नहीं दी। सरकार राहुल गांधी को विफल करने में पूरी तरह विफल रही। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को पेपर लीक को खत्म करने और भारत की परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव के लिए राजनीतिक सहमति बनाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों छात्रों और उनके परिवारों की उम्मीदों को नुकसान पहुँच रहा है। देहरादून में छात्रों की गूंज नामक जनसभा को संबोधित करते हुए, गांधी ने कहा कि देश को सरकार-केंद्रित परीक्षा प्रणाली से हटकर छात्र-केंद्रित प्रणाली की ओर बढ़ने की जरूरत है, जो लचीली, सुरक्षित और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त हो।
राहुल गांधी ने हमें इस पेपर लीक इंडस्ट्री को खत्म करने के लिए राजनीतिक सहमति बनानी होगी। गांधी ने सुरक्षित प्रश्न बैंक और रैंडम तरीके से चुने गए प्रश्न पत्रों वाले आधुनिक टेस्टिंग मॉडल की वकालत की। उन्होंने तर्क दिया कि तकनीक का इस्तेमाल लीक को बढ़ावा देने के बजाय उसे रोकने के लिए किया जा सकता है। राहुल गांधी ने कहा कि एक ही परीक्षा हॉल में अलग-अलग छात्रों को अलग-अलग प्रश्न पत्र दिए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सभी उम्मीदवारों को एक ही दिन परीक्षा में बैठने के लिए मजबूर करने के बजाय, परीक्षाओं को ज्यादा लचीलेपन के साथ आयोजित किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि वाइस-चांसलर और टेस्टिंग एजेंसियों के प्रमुखों का कोई राजनीतिक जुड़ाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुनाफा कमाने वाली निजी संस्थाओं को परीक्षा का काम सौंपने (आउटसोर्सिंग) का भी विरोध किया। उन्होंने कहा, परीक्षा कराना सरकार की जिम्मेदारी है। गांधी ने प्रश्न पत्र लीक करने में शामिल लोगों के लिए कड़ी सजा, लीक होने पर तुरंत दोबारा परीक्षा कराने और ऐसी घटनाओं से प्रभावित छात्रों को मुआवजा देने की भी मांग की।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ने पेपर लीक को युवाओं के सामने आने वाले चार बड़े अन्याय में से चौथा अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि बाकी तीन अन्याय हैं - परीक्षा की तैयारी का ज्यादा खर्च, सरकारी क्षेत्र के बाहर रोजगार के घटते अवसर और सालों की मेहनत के बावजूद सरकारी नौकरी मिलने की बहुत कम संभावना।
राहुल गांधी ने कहा कि परिवार अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में बच्चे पर पाँच साल में 9 लाख रुपये तक खर्च कर देते हैं। उन्होंने कहा कि कई उम्मीदवार दिन में आठ से दस घंटे पढ़ाई करते हैं और पूरा परिवार तैयारी की प्रक्रिया का बोझ उठाता है। गांधी के अनुसार, सरकारी नौकरी कई युवाओं की मुख्य चाहत बन गई है क्योंकि मैन्युफैक्चरिंग, एंटरप्रेन्योरशिप, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और पब्लिक सेक्टर में अवसर कम हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी नौकरी चाहने वाले लगभग नौ करोड़ लोगों में से सिर्फ छह लाख लोग ही सफल हो पाए। उन्होंने कहा, हर 150 युवाओं में से सिर्फ एक ही सफल हो पाता है। गांधी ने आरोप लगाया कि अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर हासिल करने के लिए रेट कार्ड मौजूद हैं। उन्होंने नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट से लेकर अलग-अलग राज्यों द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं के उदाहरण दिए।
राहुल गांधी ने दावा किया कि लीक हुए पेपर बांटने के लिए टेलीग्राम और सिग्नल जैसे टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल तेजी से हो रहा है और इस समस्या को एक महामारी बताया। आइसबर्ग (पानी में तैरते बर्फ के पहाड़) का उदाहरण देते हुए, गांधी ने तर्क दिया कि पेपर लीक के जो मामले सामने आए हैं, वे एक बहुत बड़ी समस्या का सिर्फ छोटा सा हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 152 से ज्यादा प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई है और दावा किया कि ऐसे मामलों में किसी को सजा नहीं हुई है।
राहुल गांधी ने सभा में मौजूद लोगों से कहा, यह आपके परिवार और आपकी कड़ी मेहनत का अपमान है। गांधी ने परीक्षा के दबाव को छात्रों की मानसिक सेहत से जुड़ी समस्याओं से भी जोड़ा। हाल ही में आत्महत्या करने वाली 23 साल की नीट उम्मीदवार रिया कुमारी के पिता, रमेश बाल राहुल गांधी के साथ मंच पर मौजूद थे। उन्होंने उस बातचीत का जिक्र किया जो नीट परीक्षा के पेपर लीक की खबर मिलने के बाद उन्होंने अपनी बेटी से की थी।
पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही की कमी का दावा करते हुए, गांधी ने आरोप लगाया कि परीक्षा सिस्टम से जुड़े सभी लोग जिनमें कोचिंग सेंटर, पेपर सेट करने वाले और अधिकारी शामिल हैं इस समस्या को बनाए रखने में शामिल हैं। उन्होंने पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े तनाव से प्रभावित छात्रों के प्रति संवेदनशीलता की कमी के लिए सरकार की आलोचना भी की।
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