वाशिंगटन। न जाने डोनाल्ड ट्रंप ने नरेंद्र मोदी का कौन सा खुफिया राज जान लिया है जिसके बल पर वे भारत को बेहद अपमानित और मजबूर करते जा रहे हैं और भारत सरकार ट्रंप की हर बात का समर्थन करते हुए उसे माने जा रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में भारत द्वारा अमेरिका से किए गए भारत विरोधी समझौते के तहत अब भारत ने रूस से तेल खरीद में कटौती की तैयारी शुरु कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नायरा एनर्जी जैसी तेल शोधनशालाओं (रिफाइनरी) के पास सीमित विकल्प होने के कारण ये आयात फिलहाल पूरी तरह बंद नहीं होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को भारत से होने वाले सभी आयातों पर 25 प्रतिशत के दंडात्मक शुल्क को रद्द करने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि यह कदम नयी दिल्ली की उस प्रतिबद्धता के बाद उठाया गया है, जिसमें रूस से तेल आयात रोकने की बात कही गई है। मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों ने बताया कि हालांकि तेल शोधनशालाओं को रूस से खरीद रोकने का कोई औपचारिक निर्देश नहीं मिला है, लेकिन उन्हें अनौपचारिक रूप से मॉस्को से खरीद कम करने की सलाह दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश तेल शोधनशालाएं इस घोषणा से पहले की गई खरीद प्रतिबद्धताओं (आमतौर पर 6-8 सप्ताह पहले दिए गए ऑर्डर) का सम्मान करेंगी, लेकिन उसके बाद नए ऑर्डर नहीं दिए जाएंगे।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) ने पिछले साल अमेरिका द्वारा रूस के प्रमुख निर्यातकों पर प्रतिबंध लगाए जाने के तुरंत बाद वहां से तेल खरीदना बंद कर दिया था। अब इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) भी अपनी खरीद धीरे-धीरे बंद करेंगे।
भारत की सबसे बड़ी खरीदार कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भी अगले कुछ हफ्तों में 1,50,000 बैरल की खेप प्राप्त होने के बाद रूसी तेल की खरीद बंद कर सकती है जिसने पिछले साल के अंत में रोसनेफ्ट और लुकॉइल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद खरीदारी रोक दी थी। इस नियम का एकमात्र अपवाद नायरा एनर्जी हो सकती है।
रूसी संबंधों (नायरा में रोसनेफ्ट की 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी) के कारण नायरा पर पहले यूरोपीय संघ और फिर ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों के कारण कोई अन्य बड़ा आपूर्तिकर्ता कंपनी के साथ व्यावसायिक लेनदेन नहीं करना चाहता, जिससे वह प्रतिबंधित नहीं की गई संस्थाओं से रूसी तेल खरीदने को मजबूर है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, वहीं वाणिज्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने भी रूसी तेल खरीद के संबंध में भारत द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
सूत्रों ने कहा कि रोसनेफ्ट और लुकॉइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने के बाद से ही रूस से भारत का तेल आयात लगातार घट रहा है। दिसंबर में अमेरिकी अधिकारियों के साथ हुई वार्ता के दौरान नायरा की इस विशिष्ट स्थिति के बारे में बताया गया था। सूत्रों का कहना है कि नायरा को श्रूसी तेल न खरीदनेश् की नीति से छूट दी जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि नायरा एनर्जी द्वारा निकट भविष्य में उन संस्थाओं से रूसी तेल की खरीद जारी रखने की संभावना है, जो प्रतिबंधों के दायरे में नहीं हैं।
दिसंबर 2025 में रूस से आयात औसतन 12 लाख बैरल प्रति दिन रहा, जो मई 2023 के 21 लाख बैरल प्रति दिन के उच्चतम स्तर से काफी कम है। जनवरी में यह घटकर 11 लाख बैरल रह गया और इस महीने या अगले महीने इसके 10 लाख बैरल से नीचे जाने की उम्मीद है। अमेरिका के साथ नयी समझौते के बाद यह आयात जल्द ही आधा हो सकता है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों द्वारा मॉस्को पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण रूस से मिलने वाले रियायती तेल ने भारत के आयात बिल को कम करने में मदद की है।
केपलर के प्रमुख शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया के अनुसार, रूस से आने वाला तेल अगले 8-10 सप्ताह के लिए पहले से ही तय है और यह भारत की तेल शोधन प्रणाली के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है। हालांकि, निवेश सूचना और क्रेडिट रेटिंग एजेंसी (इक्रा) के प्रशांत वशिष्ठ का कहना है कि भारत के पास अमेरिका और वेनेजुएला जैसे पर्याप्त विकल्प मौजूद हैं।
अमेरिका ने कहा है कि भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूस से कच्चे तेल का आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसके बाद भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को सात फरवरी से हटा लिया जाएगा। अमेरिका इस बात की भी निगरानी करेगा कि कहीं भारत भविष्य में रूस से तेल आयात दोबारा शुरू करता है या नहीं।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक कार्यकारी आदेश के मुताबिक, भारत ने अगले 10 वर्षों के लिए अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग विस्तार के एक ढांचे पर भी सहमति जताई है। इस आदेश में कहा गया है, सात फरवरी, 2026 को पूर्वी मानक समयानुसार रात 12.01 बजे या उसके बाद खपत के लिए आयात की गई या गोदाम से निकाली गई भारत की वस्तुओं पर कार्यकारी आदेश 14329 के तहत लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत मूल्य-आधारित शुल्क (ऐड वैलोरेम) लागू नहीं रहेगा।
अमेरिका ने अगस्त, 2025 में रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा दिया था। यह पहले से लगाए गए 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क के अलावा था। इस वजह से भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में कुल शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया था। स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को जारी कार्यकारी आदेश में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें कार्यकारी आदेश 14066 के तहत घोषित राष्ट्रीय आपात स्थिति से निपटने के भारतीय प्रयासों को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से अतिरिक्त जानकारी और सिफारिशें मिली हैं।
ट्रंप ने कहा, विशेष तौर पर भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूसी संघ से तेल आयात रोकने, अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदने और अगले 10 वर्षों के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने की रूपरेखा पर सहमति जताई है। इस आदेश में चेतावनी दी गई है कि यदि अमेरिका के वाणिज्य मंत्री यह पाते हैं कि भारत ने फिर से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रूसी तेल आयात शुरू कर दिया है, तो राष्ट्रपति की टीम यह सिफारिश करेगी कि भारत पर दोबारा अतिरिक्त 25 प्रतिशत मूल्यानुसार शुल्क लगाया जाए या कोई अन्य कदम उठाए जाएं।
ट्रंप ने कहा कि रूस की नीतियां और कार्रवाइयां अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए असामान्य और असाधारण खतरा बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि ताजा समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और आर्थिक मामलों में अमेरिका के साथ पर्याप्त रूप से तालमेल बिठाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इस आदेश में विदेश मंत्री मार्को रुबियो को जरूरी नियम एवं विनियम लागू करने और अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) के तहत राष्ट्रपति को प्राप्त अधिकारों के उपयोग की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों को आदेश के क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश के मुताबिक, वाणिज्य मंत्री विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय कर इस बात की निगरानी करेंगे कि भारत भविष्य में रूस से तेल आयात दोबारा शुरू करता है या नहीं।
प्रस्तुति: एपी भारती (पत्रकार, संपादक पीपुल्स फ्रैंड, रुद्रपुर, उत्तराखंड)
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