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ठेका मजदूर, इंकलाबी मजदूर केंद्र पंतनगर ने फासीवाद, मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताओं, जनविरोधी सरकारी नीतियों आम हड़ताल कर किया विरोध, साजिशों का खुलासा Contract workers and the Inquilabi Mazdoor Kendra, Pantnagar, held a general strike to protest against fascism, the four anti-labor labor codes, and anti-people government policies, exposing conspiracies



पंतनगर (ऊधम सिंह नगर) उत्तराख्ंड, 12 फरवरी 2026 (अभिलाख सिंह)। केंद्र की मोदी सरकार के मजदूर विरोधी 4 लेवर कोड के खिलाफ विभिन्न मजदूर फेडरेशनों द्वारा आयोजित राष्ट्र व्यापी आम हड़ताल पर इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर द्वारा एल खंड में आयोजित सभा में विरोध प्रदर्शन किया गया, जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी के साथ सरकार की साजिशों का खुलासा किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि मजदूर विरोधी मोदी सरकार द्वारा पूंजीपतियों के हितों आगे बढ़ाते हुए मजदूर वर्ग ने अपने अथक संघर्षों अकूत बलिदान से अंग्रेजी सरकार से हासिल किए राहतकारी 44 श्रम कानूनों को खत्म कर मजदूर विरोधी 4 लेवर कोड लागू कर मजदूरों को डेढ़ सौ साल पहले की गुलामी में ढकेल दिया गया है। मजदूरों को संगठित होने यूनियन बनाना, संघर्ष करना, जनवादी मांगे उठाना तमाम बंदिशें लगा कर कठिन कर दिया गया है। ट्रेनी, फिक्स टर्म एम्लाइमेंट लागू कर हर जगह ठेका प्रथा, मजदूरों को रखो और जब चाहे निकालो की छूट मालिकों को दे दी गई है। पहले ईपीएफ, ईएसआईसी में अंशदान कम किया और अब मालिक मजदूरों की तथाकथित सहमति के नाम पर ईपीएफ, ईएसआई से मजदूरों को बाहर करने की छूट दे दी है। ऐसे में जब शिक्षा, स्वास्थ्य का निजीकरण में महंगे इलाज के अभाव में मजदूर वे मौत मरने को मजबूर होंगे। आठ घंटे काम 8 घंटे मनोरंजन और 8 घंटे आराम के अधिकार की हत्या कर मालिकों के मुनाफे के लिए बढ़ाकर 12 घंटे कार्य दिवस लागू किया जा रहा है। महिलाओं पर बलात्कार हत्याओं की घटनाएं बढ़ रही है फिर भी महिला मजदूरों से रात्रि पाली में काम कराने की छूट दे दी गई है।

वक्ताओं ने कहा कि श्रम न्यायालय, श्रम विभाग को कमजोर कर  न्याय के रास्ते बंद कर मजदूरों को बंधुआ गुलाम बनाया जा रहा है। श्रम कानून लागू नहीं करने पर कंपनियों, संस्थाओं, मालिकों को जेल का प्रावधान हटाकर प्रतीकात्मक जुर्माने तक सीमित कर दिया है। संविधान को किनारे कर जनवादी मांगे उठाने पर लाठी गोली के दम पर मजदूरों की संवैधानिक आवाज बंद किया जा रहा है। पूंजीपरस्त चुनाववाज पार्टियों  के मजदूर फेडरेशनों द्वारा एक दिन हड़ताल की रस्म अदायगी कर मजदूरों को धोखा दे रहे हैं। वह लड़ने का माद्दा खो चुके हैं।

वक्ताओं ने कहा कि हिंदू फासिस्ट आरएसएस भाजपा द्वारा हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिकरण को बढ़ावा देकर मजदूरों की एकता को कमजोर किया जा रहा है। फिर भी जनता हिंदू फासिस्टों के महिलाओं के बलात्कार हत्याओं, मजदूर विरोधी काले कानूनों, जनविरोधी अन्य कार्रवाइयों के खिलाफ मजदूर, महिलाएं, छात्र, छात्र सड़कों पर आंदोलनरत हैं।

वक्ताओं ने कहा कि तानाशाह हिंदू फासिस्ट भाजपा सरकार को ऐतिहासिक किसान आंदोलन  से सीख लेकर मजदूरों की वर्गीय लामबंदी और जुझारू संगठित संघर्षों ,एक दिन की रस्म अदायगी हड़ताल नहीं अनिश्चित राजनीतिक हड़तालों से ही मोदी सरकार को पीछे धकेला जा सकता है। वक्ताओं ने अमेरिका से भारत की अर्थव्यवस्था, जनता, किसान, उत्पादकों, निर्यातकों, किसानों इत्यादि के खिलाफ किए गए आत्मघाती समझौते की निंदा कीी गई और समझौते को रद्द करने की मांग की गई। हड़ताल, सभा, प्रदर्शन में मनोज, राशिद, अभिलाख सिंह, अर्जुन सिंह, भूपेंद्र, सुभाष, रामानंद यादव, रियासत, पवन, रंजीत, रोहित, धर्मी, हरामनी, नविता, सुसो, सदभावन, पृथ्वी राज गौतम, मुस्लिम अंसारी आदि अनेक लोग शामिल रहे।

प्रस्तुति: एपी भारती (पत्रकार, संपादक पीपुल्स फ्रैंड, रुद्रपुर, उत्तराखंड)

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