नई दिल्ली, वाशिंगटन। भारत की जनता के खिलाफ अमेरिका से समझौता मोदी सरकार ने एपस्टीन फाइल में नरेंद्र मोदी की गर्दन बचाने या मुकदमे में फंसे गौतम अदाणी की गर्दन बचाने के लिए किया है या कोई और बात है, इसकी असल वजय सरकार ही जानती है लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत और अमेरिका के बीच हुआ व्यापार समझौता साफ-साफ भारत की व्यापक जनता के खिलाफ है। साफ पता चलता है कि डोनाल्ड ट्रंप ने नरेंद्र मोदी की गर्दन दबोच कर ही यह समझौता कराया है। कांग्रेस इस समझौते को किसानों के लिए मौत की घंटी करार दे चुकी है। भारत-अमेरिका ने संयुक्त बयान में अमेरिका और भारत ने शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की घोषणा की। इसके तहत भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त करेगा या कम करेगा। अमेरिका भारत पर शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। यह समझौता भारत के मजदूरों, किसानों, गरीबों, पशुपालकों, बागवानों के खिलाफ है और पहले ही यहां की बर्बाद अर्थव्यवस्था और बर्बाद होगी।
13 फरवरी, 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जॉन ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए व्यापक अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते तहत इस रूपरेखा में अतिरिक्त बाजार पहुंच संबंधी प्रतिबद्धताएं शामिल होंगी और यह अधिक मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं को समर्थन प्रदान करेगी। बयान में कहा गया है कि अमेरिका और भारत के बीच अंतरिम समझौता हमारे देशों की साझेदारी में मील का पत्थर साबित होगा। यह पारस्परिक हितों और ठोस परिणामों पर आधारित द्विपक्षीय और संतुलित व्यापार के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समझौते की प्रमुख शर्तों में भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या कम करेगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट तथा अन्य उत्पाद शामिल हैं।
अमेरिका, भारत में उत्पादित वस्तुओं पर 18 प्रतिशत का शुल्क लगाएगा। इन वस्तुओं में वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबड़, जैविक रसायन, घरेलू सजावट का सामान, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी शामिल हैं। बयान में कहा गया है कि अमेरिका और भारत इस रूपरेखा को तुरंत लागू करेंगे और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे ताकि सहमत रूपरेखा के अनुरूप पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को पूरा किया जा सके। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम समझौते की रूपरेखा पर सहमति से भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30,000 अरब डॉलर का बाजार खुलेगा।
पीयूष गोयल ने कहा कि इसके साथ निर्यात में वृद्धि से महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। अमेरिका और भारत ने शनिवार को संयुक्त बयान में अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने की घोषणा की। इसके तहत अमेरिका भारत पर जवाबी शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। भारत, अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क समाप्त करेगा या कम करेगा। गोयल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के निर्णायक नेतृत्व में भारत ने अमेरिका के साथ एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा तैयार कर ली है। इससे भारतीय निर्यातकों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30,000 अरब डॉलर का बाजार खुल जाएगा। निर्यात में वृद्धि से हमारी महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
पीयूष गोयल ने बताया कि इस रूपरेखा के तहत, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर जवाबी शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। इससे दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (अमेरिका) में वस्त्र एवं परिधान, चमड़ा एवं जूते, प्लास्टिक एवं रबड़ उत्पाद, जैविक रसायन, घरों में सजवाट के सामान, हस्तशिल्प उत्पाद और चुनिंदा मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में काफी अवसर प्राप्त होंगे। इसके अतिरिक्त जेनेरिक दवाइयां, रत्न एवं हीरा तथा विमान के कल-पुर्जे सहित कई प्रकार की वस्तुओं पर शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता और मेक इन इंडिया को और बढ़ावा मिलेगा।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत को विमान के कल-पुर्जों पर धारा 232 के तहत छूट, वाहन कल- पुर्जों पर शुल्क दर कोटा से लाभ भी मिलेगा, जिससे इन क्षेत्रों में निर्यात में मजबूत वृद्धि होगी। उन्होंने कहा, यह समझौता किसानों के हितों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें मक्का, गेहूं, चावल, सोया, मुर्गी पालन, दूध, पनीर, एथनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां, मांस आदि जैसे संवेदनशील कृषि और दुग्ध उत्पादों को पूर्ण रूप से संरक्षित किया गया है। उन्होंने कहा, यह समझौता भारत और अमेरिका को आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा, जो हमारे लोगों और कंपनियों के लिए सतत विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत की अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान खरीदने की योजना है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के कल-पुर्जे, बहुमूल्य धातु, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोयला शामिल हैं। दोनों देशों ने शनिवार को एक संयुक्त बयान में यह कहा। बयान के अनुसार, दोनों देश ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट और डेटा केंद्रों में उपयोग होने वाले अन्य सामानों सहित प्रौद्योगिकी से जुड़े उत्पादों के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संयुक्त सहयोग का विस्तार करेंगे।
भारत अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान के कल-पुर्जे, बहुमूल्य धातुएं, तकनीकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा रखता है।श्श् बयान में यह भी कहा गया है कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत अमेरिका और भारत भेदभावपूर्ण या बोझिल गतिविधियों और डिजिटल व्यापार में अन्य बाधाओं को दूर करने और मजबूत, महत्वाकांक्षी तथा पारस्परिक रूप से लाभकारी डिजिटल व्यापार नियमों को प्राप्त करने के लिए एक स्पष्ट मार्ग निर्धारित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अमेरिकी उत्पादकों को अमेरिकी सरकार से भारी सब्सिडी मिलती है, वे पहले ही फायदे में हैं, जबकि भारत के किसान, बागवान, पशुपालक बेहद मुश्किल में हैं। रूपरेखा देखने से स्पष्ट हो रहा है कि भारत को इससे केवल और केवल घाटा ही है, फायदा सिर्फ अमेरिका को है, इसलिए अमेरिका में इस समझौते के लिए जश्न मनाया जा रहा है।
समझौते की रूपरेखा सामने आने से पूर्व ही जंडियाला गुरु (अमृतसर) में पंजाब कांग्रेस नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर गंभीर चिंता जताते हुए शुक्रवार को कहा कि इससे अमेरिकी कृषि उत्पाद बड़े पैमाने पर भारतीय बाजारों में आ जाएंगे, जो देश के किसानों के लिए मौत की घंटी साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में झुक गए हैं और देश के हितों के खिलाफ शर्तें मानने के लिए मजबूर हुए हैं।
यहां मनरेगा बचाओ संग्राम रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने संकल्प लिया कि जैसे प्रधानमंत्री मोदी को तीन विवादित कृषि कानून वापस लेने के लिए मजबूर किया गया था, उसी तरह कांग्रेस पार्टी उन्हें मनरेगा बहाल करने के लिए भी मजबूर करेगी। यहां छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने कहा कि यदि भाजपा सरकार मनरेगा बहाल नहीं करती, तो 2027 में पंजाब में बनने वाली कांग्रेस सरकार गरीब मजदूरों के लिए विशेष प्रबंध करेगी, ताकि उन पर इसके खत्म होने का असर न पड़े। उन्होंने कहा कि 2029 में केंद्र में राहुल गांधी के नेतृत्व में बनने वाली कांग्रेस सरकार मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करेगी। बघेल ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह समझौते कर चुके हैं और जितना ज्यादा समय वह सत्ता में रहेंगे, देश के लिए उतना ही खतरनाक होगा। उन्होंने कहा कि वह जितनी जल्दी सत्ता छोड़ें, देश के लिए उतना ही बेहतर होगा। उन्होंने अफसोस जताया कि मोदी के दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति ही यह तय करता है कि भारत कहां से तेल खरीदे और श्ऑपरेशन सिंदूरश् कब रोका जाए।
बघेल ने एपस्टीन फाइलों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा नेता इस मुद्दे पर चुप हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा नेता कश्मीर फाइल्स और केरल फाइल्स जैसी फिल्मों का जश्न मनाते हैं, लेकिन एपस्टीन फाइलों पर खामोश हैं, क्योंकि इनमें प्रधानमंत्री मोदी और हरदीप पुरी के नाम दर्ज हैं। इस दौरान पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को पंजाब में मनरेगा योजना लागू करने में असफल रहने के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जहां श्री मोदी ने अब यह योजना खत्म कर दी है, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान भी असफल रहे हैं, क्योंकि पंजाब में इस योजना के तहत बहुत कम काम दिया जा रहा था।
प्रस्तुति: एपी भारती (पत्रकार, संपादक पीपुल्स फ्रैंड, रुद्रपुर, उत्तराखंड)
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