तेहरान, वॉशिंगटन। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी जारी संघर्ष अब और व्यापक होता नजर आ रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसने उत्तरी फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया है। यह कार्रवाई ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना पर हुए हमले के बाद बदले के तौर पर की गई बताई जा रही है। ईरान की अर्धसैनिक बल इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने गुरुवार को इस हमले का दावा किया। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, हमले के बाद अमेरिकी जहाज में आग लग गई थी। इस दावे पर यद्यपि अमेरिका की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण पूरे क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान का यह दावा श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास हुए एक बड़े घटनाक्रम के बाद सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस डेना को टॉरपीडो से निशाना बनाया, जिसके कारण जहाज डूब गया। इस घटना में कम से कम 87 ईरानी नाविकों के मारे जाने की खबर है। ईरान ने इस हमले को समुद्र में अत्याचार करार दिया है और इसके गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि इस कार्रवाई के लिए अमेरिका को बहुत पछतावा होगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका ने जो कदम उठाया है, उसका जवाब जरूर दिया जाएगा। यहां बेहद शर्मनाक बात यह हुई कि आईआरआईएस डेना और उस पर सवार 180 ईरानी नौ सेना के लोग भारत के मेेहमान थे, जो कई दिन भारतीय नौ सेना के साथ रहकर स्वदेश वापस लौट रहे थे और अमेरिका ने भारत के काफी करीब आकर इस जहाज को समुद्र में डुबो दिया। अपने मेहमानों को निशाना बनाने पर भारत अमेरिका की निंदा तक नहीं कर सका। भारत के इस रुख की देश और दुनिया भर में आलोचना हो रही है।
ईरान समाचार एजेंसी इरना (इस्लामिक रिपब्लिकन न्यूज एजेंसी) के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना ने उत्तरी फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। आईआरजीसी के जनसंपर्क विभाग ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि यह हमला ईरानी युद्धपोत पर किए गए हमले के जवाब में किया गया है। बयान में जहाज की पहचान, नुकसान की मात्रा या अन्य विवरणों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई। अमेरिका की ओर से भी इस दावे की पुष्टि या खंडन अभी तक नहीं किया गया है। ईरान ने इस घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चेतावनी दी है। आईआरजीसी ने कहा है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर उसका नियंत्रण रहेगा। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि इस मार्ग में बाधा आती है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। भारत का करीब 40 फीसदी तेल और गैस इसी रास्ते से आता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि मौजूदा संघर्ष पश्चिम एशिया से आगे बढ़कर हिंद महासागर क्षेत्र तक फैल सकता है। श्रीलंका के पास हुए नौसैनिक हमले और उसके बाद फारस की खाड़ी में कथित जवाबी कार्रवाई से यह स्पष्ट हो रहा है कि टकराव का दायरा बढ़ रहा है। यह क्षेत्र भारत सहित कई देशों के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां से होकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख मार्ग गुजरते हैं। ईरान ने गुरुवार को इजरायल और अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ हमलों की नई लहर शुरू करने का भी दावा किया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। साथ ही इजरायल के कई शहरों जैसे तेल अवीव और यरुशलम में हवाई हमलों की चेतावनी के सायरन बजने की खबरें सामने आई हैं।
उधर इजरायली सेना ने भी बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की बात कही है। इजरायल के अनुसार, उसने पिछले 24 घंटों में लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह संगठन के करीब 80 ठिकानों को निशाना बनाया है। इजरायल ने यह भी कहा कि उसने ईरान के अंदर लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च साइट्स और अन्य सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों को इजरायल ने अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है। संघर्ष के चलते दोनों पक्षों को भारी नुकसान होने की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक इस संघर्ष में ईरान में 1200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं अमेरिका के भी छह सैनिकों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है।
इस भारी तनाव के बीच ईरान के कुछ धार्मिक नेताओं ने भी अमेरिका के खिलाफ कड़े बयान दिए हैं। एक प्रमुख धार्मिक नेता ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ भी तीखी टिप्पणी की। इन बयानों से यह संकेत मिलता है कि राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर भी इस संघर्ष ने गंभीर रूप ले लिया है। पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते इस तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो यह संघर्ष और बड़े क्षेत्रीय या वैश्विक संकट का रूप ले सकता है। दुनिया के कई देश पहले ही संयम बरतने और संवाद के माध्यम से समाधान खोजने की अपील कर चुके हैं। समुद्री मार्गों पर बढ़ती गतिविधियां और लगातार हो रहे सैन्य हमले इस संघर्ष को और जटिल बना रहे हैं। इससे भारत सहित पूरी दुनिया में सप्लाई बाधित हो रही है, कारोबार को भारी नुक्सान हो रहा है, आने वाले दिनों में चीजों के दाम बढ़ने से जनता भी परेशान होगी।
प्रस्तुति: एपी भारती (पत्रकार, संपादक पीपुल्स फ्रैंड, रुद्रपुर, उत्तराखंड)
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