कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा हैरतअंगेज चोरी की घटना सामने आई है जिसमें यहां 40 साल से अधिक पुराना और करीब 10 टन वजनी स्टील पुल रातों-रात चुराकर गायब कर लिया गया। यह पुल नहर पर बना था और पैदल यात्रियों के इस्तेमाल में आता था। पुलिस ने इस मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। पुलिस के मुताबिक यह 70 फीट लंबा स्टील पुल हसदेव लेफ्ट कैनाल पर बना हुआ था और कोरबा के ढोडीपारा क्षेत्र के वार्ड नंबर-17 में स्थित था। 18 जनवरी को स्थानीय लोगों ने पुल के गायब होने की सूचना दी, जिसके बाद क्षेत्र के पार्षद लक्ष्मण श्रीवास ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार, यह 70 फीट लंबा स्टील पुल हसदेव लेफ्ट कैनाल पर बना हुआ था और कोरबा के ढोडीपारा क्षेत्र के वार्ड नंबर-17 में स्थित था। 18 जनवरी को स्थानीय लोगों ने पुल के गायब होने की सूचना दी, जिसके बाद क्षेत्र के पार्षद लक्ष्मण श्रीवास ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। कोरबा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पाटले ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने गैस कटर की मदद से पुल की लोहे की रेलिंग और संरचना को काटा और फिर उसे स्क्रैप में बेचने के इरादे से चोरी कर लिया। शिकायत मिलने के बाद सीएसईबी पुलिस चौकी में मामला दर्ज कर एक विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी जांच, मुखबिरों से मिली जानकारी और लगातार पूछताछ के बाद पुलिस ने इस मामले में 15 लोगों की संलिप्तता का पता लगाया है। इनमें से पांच आरोपी लोचन केवट (20), जयसिंह राजपूत (23), मोती प्रजापति (27), सुमित साहू (19) और केशवपुरी गोस्वामी उर्फ पिक्चर (22) को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने जानकारी दी कि पूछताछ में आरोपियों ने पुल चोरी कर लोहे को स्क्रैप में बेचने की बात कबूल की है। मुख्य आरोपियों मुकेश साहू और असलम खान सहित 10 अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। सीएसईबी पुलिस चौकी प्रभारी भीमसेन यादव ने बताया कि चोरी किया गया करीब सात टन स्टील नहर के भीतर छिपाकर रखा गया था, जिसे बरामद कर लिया गया है। चोरी में इस्तेमाल किया गया वाहन भी जब्त कर लिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि शेष स्टील कहां बेचा गया। पार्षद लक्ष्मण श्रीवास ने बताया कि करीब 70 फीट लंबा और पांच फीट चौड़ा यह पुल लगभग 40 साल पुराना था और इसका वजन 10 टन से अधिक था। पुल चाोरी होने के बाद स्थानीय लोग नहर पार करने के लिए पास के एक कंक्रीट पुल का उपयोग कर रहे हैं।
प्रस्तुति: एपी भारती (पत्रकार, संपादक पीपुल्स फ्रैंड, रुद्रपुर, उत्तराखंड)
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