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पानी-पूरी में कैंसरकारी तत्व शामिल, तेजाब, बनावटी खतरनाक रंगों, स्वाद बढ़ाने वाले तत्वों से अस्थमा और अन्य बीमारियों का खतरा Pani Puri contains carcinogenic elements, acid, artificial dangerous colours, flavour enhancers, risk of asthma and other diseases



नई दिल्ली। बाजार में ठेलियों, रेस्तराओं में ऐसी चीजों की भरमार है जो लीवर, हृदय, गुर्दे सहित शरीर के तमाम अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाली हैं। और कैंसर के तत्व तो लगभग सभी में हैं। कैंसर के रोगियों में पिछले कुछ सालों में बंपर बढ़ोत्तरी हुई और कैंसर का मुकम्मल इलाज आज तक नहीं विकसित किया जा सका है। पानी-पूरी खाने के शौकीन लोगों के लिए बुरी खबर है। विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल रंगों से भरी पानी-पूरी खाने से कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा कैंसर और अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है। कई शिकायतों के आधार पर कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने सड़क किनारे स्टालों से लगभग 260 नमूने एकत्र किए। इनमें से 22 प्रतिशत पानी-पूरी गुणवत्ता परीक्षण में खरी नहीं उतर पाई। लगभग 41 नमूनों में आर्टिफिशियल रंगों के साथ कैंसर पैदा करने वाले एजेंट शामिल थे। 18 नमूने बासी माल (खाने लायक नहीं) के थे। जून के अंत में कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा और मानक विभाग ने राज्य भर में चिकन कबाब, मछली और सब्जियों के व्यंजनों में आर्टिफिशियल रंगों का उपयोग करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का आदेश पारित किया था।

बीते मार्च में गोभी मंचूरियन और कॉटन कैंडी में इस्तेमाल होने वाले आर्टिफिशियल रंग एजेंट रोडामाइन-बी के उपयोग पर कर्नाटक में प्रतिबंध लगा दिया गया था। बेंगलुरु के क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल में हेड ऑफ सर्विसेज एडविना राज ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया, व्यंजन को अधिक आकर्षक बनाने और स्वाद बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल रंगों का उपयोग किया जाता है, जो विभिन्न स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बनते हैं। खासकर उन लोगों में जो अक्सर विदेशी भोजन का सेवन करते हैं। भोजन में ऐसे सिंथेटिक तत्वों के अत्यधिक संपर्क से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है और सूजन बढ़ने से पेट का स्वास्थ्य खराब हो जाता है।

खाद्य और स्वास्थ्य मामलों के विशेषज्ञ ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप बच्चों में अतिसक्रियता, एलर्जी के लक्षण और दमा के दौरे भी पड़ सकते हैं। इसके अलावा, अगर पानी-पूरी में इस्तेमाल किया गया पानी दूषित है तो इससे टाइफाइड जैसी खाद्य जनित बीमारियां भी हो सकती हैं। लोगों को लुभाने के लिए दुकानदार इसमें आर्टिफिशियल रंगों का उपयोग करते हैं। जिससे इसके स्वाद को बढ़ाया जाता है। खाद्य पदार्थों में सनसेट येलो, कार्मोइसिन और रोडामाइन-बी जैसे रंगों का उपयोग कई स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। एडविना राज ने कहा कि आर्टिफिशियल रंगों के बजाय कोई भी ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकता है, जो चुकंदर, हल्दी, केसर आदि का उपयोग करके प्राकृतिक रंग और स्वाद से बनाए गए हो।

ध्यान रहे कि रेस्तराओं और ठेलियों, ढाबों पर ग्राहकों की सेहत से खुलेआम व्यापक स्तर पर खिलवाड़ किया जा रहा है। बासी खाना, घटिया, मिलावटी चीजें उपलब्ध कराई जा रही हैं। पानी पूरी के पानी को तीखा करने के लिए सिरके की जगह सस्ता तेजाब इस्तेमाल किया जा रहा है। जो सिरका बोतल में बाजार में उपलब्ध है वह भी प्राकृतिक रूप से नहीं बना है, उसके निर्माण में कैंसरकारी तत्वों का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वाद के चक्कर में ग्राहक अपना पैसा अपने लिए बीमारियां खरीदने में उड़ा रहे हैं।

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