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हिमालयी पर्यावरण संस्थान ने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में फसलों के उत्पादन, प्रसंस्करण, जैव विविधता संरक्षण, आजीविका संवर्धन की दी जानकारी Himalayan Environment Institute gave information on crop production, processing, biodiversity conservation, livelihood promotion in Vibrant Village Program



अल्मोड़ा (उत्तराखंड) 5 जुलाई। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत धारचूला के सीमावर्ती गावों में प्रशिक्षण कार्यक्रम गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, कोसी-कटारमल, अल्मोड़ा के सामाजिक एवं आर्थिक विकास केंद्र के तत्वाधान में भारत के सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीण समुदाय के किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु स्थानीय पारंपरिक फसलों के उत्पादन एवं प्रसंस्करण द्वारा जैव विविधता संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन बलुवाकोट, धारचूला में किया गया। कार्यशाला में दारमा, व्यास एवं चौदास घाटियों से आये जनप्रतिनिधि एवं 60 से अधिक महिला, पुरूष किसानों ने प्रतिभाग किया। संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. शैलजा पुनेठा ने स्थानीय पारंपरिक फसलों के उत्पादन, पारंपरिक किस्मों एवं खाद्य प्रसंस्करण, संरक्षण एवं उनके मूल्य संवर्धन द्वारा आजीविका संवर्धन की जानकारी दी जिनसे उत्पादन एवं कृषकों को लाभ मिल सके। उन्होंने खेती के आधुनिक तकनीकों के साथ ही पारंपरिक तौर तरीकों को उपयोग कर सतत विकास की संभावनों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी।

उद्यान विभाग से भेषज कार्यकम के प्रभारी ने विभाग द्वारा संचालित जड़ी बूटी उत्पादन संबंधी सभी योजनाओं की जानकारी दी। एएचआरडी के शाखा केंद्र, पिथौरागढ़ से आए एन.डी. जोशी ने जड़ी बूटी उत्पादन हेतु पंजीकरण संबंधी विस्तृत जानकारी कृषकों को दी एवं संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यो पर चर्चा की। हिमचुली एग्री फॉउंडेशन के डाइरेक्टर किशन बोनाल एवं भूपाल सिंह गड़िया ने प्रोडक्ट मार्केटिंग एवं बिजनेस प्लान के बारे में किसानों को बताया। कार्यशाला के अंत में आएएलएम के स्टार्टअप ग्रामीण उद्यमिता कार्यक्रम के क्षेत्रीय प्रभारी ने स्वयं सहायता समूहों के लिए चलाये जा रहे स्टार्टअप उद्यमिता कार्यक्रम की जानकारी दी।

कार्यशाला के द्वितीय सत्र में संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. शैलजा पुनेठा ने भारत सरकार ने चलाये जा रहे बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों एवं ग्रामीण समुदाय को दिए जा रहे लाभ के बारे में बताया। कार्यशाला आयोजन में बलुआकोट के ग्राम प्रधान पूरन सिंह अपना सहयोग दिया। कार्यक्रम में कमला देवी, कुंती देवी, राहुल सामंत, तुलसी देवी, लोकेश सिंह आदि अनेक लोग थे।

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